लोहा दाँतों से
काटते थे सच्ची
पर कोई वीडियो नहीं
उसका हमारे पास
बेचने को ठीक ठाक
तंदुरुस्त शरीर भी नहीं
यह भी ख़ुद बताते हुए
बेशर्मी से कि कैसे फन्ने खां हैं हम
हम सब ग्यारह बार
अकेले जितने अकेले
फिसलकर गिरने की किसी
घटना में बचाए नहीं जा सकने वाले अकेले
गुम होने जाते तब भी
छोड़ते जाते सुराग वाले अकेले
कि कोई ढूंढ़ने आए
क्या पता
