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इतना रवाना हुए कि घर भी पहुँचने की तरह लौटे

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हम सब बचा रहे थे अपने-अपने घरों की औरतें

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तुम माँगती हुई सपना, मैं तकिया खरीदकर देता हुआ

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तुम काटती जाती फ़ोन

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कहीं और करेंगे हम अपने बच्चे पैदा

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ग्यारहवीं ए के लड़के

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कैसे लेते हैं आप लोगों से विदा?

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पर हम थे कि कसूर था

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किसी इतवार का गाना

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महान होने से ठीक पहले एक नदी थी