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फुसफुसाना, बोलना या चीख पड़ना बहुत ज़रूरी था

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मैं जब भी फ़िल्मों की बात करता था तो वे सब शाहरुख को ही ले आते थे।

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सपनों का मर जाना सामाजिक हर्ष का विषय है

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उसका बहुत मन करता था कि वह आँखों में तितली या गुब्बारा या माउथ ऑरगन लगाकर सोए।

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मुझे चाँदी के दिन चाहिए...

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मैं जिनके लिए नहीं लिखता, वे मुझ पर अपना वक़्त बर्बाद न करें

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और जीते रहना इतना आसान है कि

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तुम यूं लिखना कि सुन्दर लगे, अश्लील न लगे

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रातें उन दिनों की चालाक प्रेमिकाएं थीं। वे रतियाए हुए खूबसूरत दिन थे...

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तुम्हारी बाँहों में मछलियाँ क्यों नहीं हैं और नॉस्टेल्जिया