इतना सुख होगा

जब बारिश होगी,
रेत होगी,
कोई पहाड़ होगा
जहाँ शाम को रेस्तरां में बैठकर
हम सोच रहे होंगे कोई सुखमयी बात,
छुट्टियाँ होंगी,
लौटकर जाने के लिए होगा घर,
स्लीपर में आमने सामने वाली अपर बर्थ पर लेटेंगे हम
और सुबह जल्दी जगेंगे।

इतना सुख होगा
कि हम अघा जाएँगे पगली।



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8 पाठकों का कहना है :

समयचक्र - महेद्र मिश्रा said...

जोरदार कल्पना रचना में समाहित की है . बधाई

सुशील कुमार छौक्कर said...

इतना सुख होगा
कि हम अघा जाएँगे पगली।
उम्दा।

मीत said...

क्या बात है !! न जाने किंतनी आंखों का ख्वाब !

अनिल कान्त : said...

haan bhai chhuttiyaan aur sukh ek doosare ke poorak bhi hain



Anil Kant
http://www.anilkant.blogspot.com/

संगीता पुरी said...

वाह !!!

विनय said...

बहुत सुन्दर


---आपका हार्दिक स्वागत है
चाँद, बादल और शाम

निखिल आनन्द गिरि said...

आप तो सचमुच पॉज़िटिव लिखने लगे....
पगले कहीं के...

निखिल

gaurav ahuja said...

chalo gam se sukh ki taraf to bade...agli baar tab likhiyon jab bahut khush ho na ki jab emotional ya gambhir..yani ki tab jab holi ki chutti main jab ghar jayega..train ki upper berth main baithkar...