बुरी खबरें

अक्सर बुरी खबरें
आशंकाओं के आसमान से नहीं टपकती,
वे अचानक आती हैं
आसमानी बिजली की तरह
और तोड़-फोड़कर,
बिखेरकर,
जलाकर
ख़त्म हो जाती हैं,
जैसे कभी आई ही न हों,
सुबह आहट होती है दरवाजे पर
और आप
अख़बार की उम्मीद में
दौड़कर दरवाजा खोलते हैं,
आपके घर फ़ोन नहीं है
तो बुरी खबरें
उनींदे, झल्लाए पड़ोसी के फ़ोन से
सुबह दरवाजे पर पहुँचाई जाती हैं,
यदि फ़ोन है आपके पास
तो एक मिस्ड कॉल आती है
किसी बहुत प्यारे इंसान के नम्बर से
और खूबसूरत शाम में
चाय की चुस्कियाँ लेते हुए
आप जवाब में कॉल करते हैं,
पहाड़ सी बुरी खबरें
तीस सेकण्ड में खत्म हो जाती हैं,
फ़ोन काट दिया जाता है
और
हाथ, कान, फ़ोन, दीवारें, दिल
छटपटाते रहते हैं देर तक,
टी.वी. पर भी
चैनल बदलती उंगलियाँ
कभी-कभी थम जाती हैं
किसी समाचार चैनल पर,
चीखती हैं आँखें,
रोते हैं होठ,
आपकी सबसे बुरी खबरें
कभी कभी बहुत हृदयहीनता से
'ताज़ा' कहकर दिखाई जाती हैं,
एक दोपहर
मेरी माँ लौटी थी दफ़्तर से,
हाथ में सब्जियों का थैला लटकाए,
दिमाग में फ़िक्र लिए
धूप में सूख रही बड़ियों की,
मुझे डाँटती हुई,
"रोज देर से नहाता है तू",
कोई नहीं समझ सकता
कि मेरी
पथराई, अभागी आँखों ने
उससे कैसे कहा होगा
कि उसके पिता नहीं रहे,
कि वह अनाथ हो गई है,
कि वह अबके मायके जाएगी
तो उसकी माँ
ज़िन्दा लाश बन चुकी होगी,
उस दिन
वो खबर उसे सुनाना
उसकी हत्या करने जैसा था,
सच में......



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4 पाठकों का कहना है :

divyabh said...

वाहSSS बिल्कुल नये अंदाज और नये विषय को लेकर लिखी गई एक सुंदर व तर्कपूर्ण रचना है…।
काफी अच्छा।

dazedandconfused said...

padhne mein mazaa aaya...phir aaongaa!

परमजीत बाली said...

बहुत बढिया रचना है\बधाई।

Anonymous said...

manish mlhotra from bahraich(u.p.) appreciates the realistic descrption of "bad news"