प्यार, पूर्वाग्रह और लड़कियाँ

शराब पीकर झूमती हुई लड़की
बेहद मासूमियत से अंग्रेज़ी में कहती है मुझसे
कि मुझसे प्यार करती है वह।
मैं शहर से पूछता हूं कि
क्या किया जा सकता है
तुम्हारी लड़कियों पर भरोसा?
शहर में शोर है,
चुप चुप सा है शहर।

मुझे लगता रहा है कि
इस कमज़ोर सी बेमुरव्वत ज़िन्दगी में
लड़कियों के सहारे पर बड़ी उम्मीदों के पुल बाँधना
अपने आप से किया गया
एक शरारती किस्म का मज़ाक है।
लड़कियाँ होती हैं इतनी अबूझ,
इतनी अनिश्चित
कि अगले ही पल बौखला पड़ने से पहले
वे रुमाल से पोंछ रही होती हैं लिपस्टिक
या गुनगुना रही होती हैं
कोई छद्म रोमांटिक गाना।

लड़कियों को इतनी प्यारी होती है खुशी
कि उसके साथ नहीं जी पाता
प्यार का सनातन दुख।
उन्हें पसंद होते हैं
मज़ाकिया लड़के
मसलन अक्षय कुमार
या वे शायद प्यार कर सकती हैं
डेरीमिल्क से भी
बशर्तें वह हँस सकती हो।
प्यार एक बहुत गंभीर मसला है
और सच में उसके बारे में बात करने पर
ऊबने लगती हैं अधिकांश लड़कियाँ।
उन्हें भले लगते हैं
जादुई सपने,
इन्द्रधनुषी रोमांच,
गुदगुदे बच्चे,
टेडी बियर,
चॉकलेट
और लाल गुलाब।
कभी कभी कुछ और चीजें भी।

आसमान उदास है,
शहर को नहीं है फ़ुर्सत,
शराब पीकर झूमती हुई लड़की
जा चुकी है अकेली अपने घर
और हैं बहुत से पूर्वाग्रह,
लेकिन फिर भी
मेरा जोरों से मन है कि प्यार किया जाए।
मैं सड़क के उस पार बैठी
एक अनजान मासूम सी लड़की से पूछता हूं
कि चलोगी फ़िल्म देखने?

प्यार एक बहुत गंभीर मसला है।
इंटरवल में एक दूसरे के हाथों से
पॉपकॉर्न खाते हुए
हम बात करते रहते हैं
करण जौहर के कालजयी सिनेमा की।



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17 पाठकों का कहना है :

Avanish Gautam said...

:) badiya!!

महेन said...

लम्बे अरसे बाद एक अच्छी कविता पोस्ट की है गौरव। वैचारिकता में मतभेद की गुंजाईश बन रही है फिर भी कविता बेहद अच्छी लगी।

मनुज मेहता said...

विचारों में मतभेद साफ़ झलक रहा है, ऐसा लग रहा है की कई विचार और कुछ आँखों देखी हकीकत को कागज़ पर उतरा है. बेशक काफी प्रभावशाली रचना.

भुवनेश शर्मा said...

बढि़या
करण जौहर का कालजयी सिनेमा...भई वाह :)

प्रशांत मलिक said...

अंग्रेजी में कहे गए पर विस्वास न किया करो गौरव भाई
वैसे कुछ बातों में दम तो है, सारियों में नहीं :)

ashish said...

" प्यार एक बहुत गंभीर मसला है। "
पर "grown up " लडकियां इन प्यार जैसी बातों को गंभीरता से नहीं लेतीं | ये तो आप अच्छे से जानते हैं गौरव जी |

Arvind Aditya said...

इस शीशा ऐ दिल का क्या करें ?इतना भंगुर भी नहीं पर इसे सच्चे प्यार की दरकार हमेशा रहती है । और लड़कियां हैं कि चिरकुटात्मक लोगों के साथ ज्यादा रहती हैं । ग़ालिब का मशहूर शेर देखें -
दिले नादाँ तुझे हुआ क्या है ,आख़िर इस दर्द की दवा क्या है?
हमको उन से वफ़ा कि है उम्मीद जो नहीं जानते वफ़ा क्या है।

makrand said...

एक अनजान मासूम सी लड़की से पूछता हूं
कि चलोगी फ़िल्म देखने?

bahut sunder prashna

sunder kavita
regards

आलोक सिंह "साहिल" said...

ek bahut hi behatarin kavita.kavita cum vishleshan.
ALOK SINGH "SAHIL"

अपना अपना आसमां said...

गौरव मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है...
‘शहर’ के पास सचमुच प्यार जताती लड़कियाँ हैं
पर लड़कियों के पास प्रेम की तपिश नहीं

फास्टफूड की तरह अब प्रेम भी मॅकडोनाल्ड की मेज पर फास्टलव की तरह बिकता दिखेगा...

दिलकश रचना...बधाई! सुमित सिंह

sumit said...

ladkiyo ke liye 3 type ke ladke hote hai...
1) boyfriend material
2) husband material
3) nothng

aap ne pahli type ke ladko ka charitra chitran kiya hai,,aasha karta hu agli baar bakiyo ko bhi mauka milega.....

Deenu Kaka said...

सोरी यार, मुझे नहीं पता था एक ज़रा से सवाल से तुम इतने परेशां हो जाओगे. वैसे कवि का धर्म निभा दिया तुमने, पीले-लाल को भी नील से रंग दिया तुमने....

vinay said...

sahi kaha bhaijan.....

आलोक शंकर said...

लड़कियों को इतनी प्यारी होती है खुशी
कि उसके साथ नहीं जी पाता
प्यार का सनातन दुख।

On spot !

आलोक शंकर said...

प्यार एक बहुत गंभीर मसला है
और सच में उसके बारे में बात करने पर
ऊबने लगती हैं अधिकांश लड़कियाँ।

Pure GOld :)

विपुल said...

कहते हैं की भुट्टा पका या नही इसके लिए एक दाना देखना ही काफ़ी होता है! इस उक्ति पर मुझे तो हमेशा से ही संदेह रहा है|गौरव भाई कच्चे भुट्टो के खेत में ही हमेशा घूमते रहे हैं !कविता की मारक क्षमता से इनकार नही|अत्यंत प्रभावशाली रचना| कई बिंब तो कमाल के हैं|थोड़ा वैचारिक मतभेद है पर "कविता नितांत वैयक्तिक विचारों की अभिव्यक्ति है" इसे सही मानकर गौरव जी को इस दीर्घप्रतीक्षित कविता के लिए बधाई!

renu said...

ladkiyon ko samajhana itna aasan hota ladko ke liye toh.....kabhi dhokha hota hi nhi duniya me..mr solanki.!!
well,..wish me congrats...finally koi kavita samajh ayi aapki mujhe...aur achchi hai....
lekin unn ladkiyon ka kya jinhe aap jaise hi kisi ladke ne dhoka diya ho....
....to kya ladkiyon ko pyar isliye krna chahiye ki dil tootne k baad khud par bharosa karne se pahle bhi sochna pad jaye....
.........usse achcha hai ki hum ladkiyaan pyar ko yunhi duur rehne de khud se...???...kitne dusre rishte hain jinke liye kuch kiya ja sakta hai...pyar karne k alawa....
...jaanbhujhkar khud ko hurt karna toh bevkufi hi hai naa.....??...haan hai hume khushi se pyar...kyunki khush rehna haq hai hamara..!!
...ab aur nahi plzzzz...???...